सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्या है (CoE)? बीसीसीआई के सचिव देवजीत साइकिया ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण से भविष्य की योजनाओं और विकास कार्यक्रमों पर विशेष रिपोर्ट: मनोज दत्त


Manoj Dutt, Journalist / Commentator
बीसीसीआई की नई सोच
बीसीसीआई अब भारतीय क्रिकेट को भविष्य के लिए और ज्यादा मजबूत बनाना चाहता है। बोर्ड की सोच साफ है कि सिर्फ आज की टीम नहीं, बल्कि आने वाले 10–15 साल तक टीम इंडिया दुनिया की सबसे ताकतवर टीम बनी रहे। इसी सोच के तहत बेंगलुरु के पास एक नया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) तैयार किया गया है।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्या है?
यह सेंटर सिर्फ एक ट्रेनिंग ग्राउंड नहीं है। यहां खिलाड़ियों को हर तरह की आधुनिक सुविधा दी जा रही है। इसका मकसद है कि खिलाड़ी भारत में रहते हुए ही विदेशी हालात में खेलने की तैयारी कर सकें। बीसीसीआई सचिव देवाजीत सैकिया और एनसीए प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण इस सेंटर की निगरानी कर रहे हैं।
विदेश जैसी पिचों पर अभ्यास
इस सेंटर में तीन ऐसे मैदान बनाए गए हैं, जिनकी पिच इंग्लैंड के मशहूर ओवल मैदान जैसी है। इससे खिलाड़ियों को इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में खेलने की आदत पहले से हो जाएगी। इसके अलावा यहां 45 अलग-अलग आउटडोर पिचें भी हैं, ताकि हर तरह की गेंदबाज़ी और परिस्थितियों में अभ्यास हो सके। फिटनेस पर पूरा ध्यान, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में आधुनिक जिम, रिकवरी रूम और फिटनेस से जुड़ी नई तकनीकें मौजूद हैं। अब खिलाड़ियों की फिटनेस पर कोई समझौता नहीं होगा। हर खिलाड़ी की ताकत, कमजोरी और फिटनेस को ध्यान में रखकर अलग-अलग ट्रेनिंग प्लान बनाया जाएगा
🗓️ बैठक का उद्देश्य और मुख्य बातें
1. CoE की वर्तमान गतिविधियों की समीक्षा
बैठक का मुख्य फोकस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की मौजूदा गतिविधियों और संचालन की समीक्षा करना था। लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि यह संस्थान भारत के युवा क्रिकेटरों की प्रतिभा निखारने में और अधिक प्रभावी बन सके।
2. भविष्य के लिए रोडमैप तैयार करना
बैठक में CoE के भविष्य के रोडमैप/कार्यक्रमों पर योजना तैयार की गई, जिससे युवा क्रिकेटरों के प्रशिक्षण, विकास और प्रतिस्पर्धी स्तर पर प्रदर्शन को और मजबूती मिले।
3. शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी
इस बैठक में बीसीसीआई अध्यक्ष मिथुन मन्हास और उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला भी शामिल रहे, जो चर्चा को दिशा देने तथा निर्णय लेने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
4. तकनीकी पदों पर भर्ती पर चर्चा
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि CoE में कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी पद खाली हैं (जैसे हेड ऑफ एजुकेशन, हेड ऑफ स्पोर्ट्स साइंस) और जल्द ही भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि प्रशिक्षण स्टाफ मजबूत किया जा सके।
5. इंडिया ‘ए’ और अंडर-19 टीमों के दौरों की रूपरेखा
बैठक में यह भी चर्चा की गई कि कैसे इंडिया ‘ए’ और अंडर-19 टीमों के आयोजन/दौरों को बेहतर तरीके से व्यवस्थिक किया जा सके, ताकि युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय अनुभव प्राप्त कर सकें।
वीवीएस लक्ष्मण की भूमिका
वीवीएस लक्ष्मण 2021 से Centre of Excellence के प्रमुख हैं और बोर्ड युवा प्रतिभाओं को विकसित करने में CoE की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर लगातार काम कर रहे हैं।
अफवाहों का खंडन
इस बैठक के दौरान, देवजीत साइकिया ने कुछ खबरों का खंडन भी किया, जिनमें कहा जा रहा था कि लक्ष्मण को राष्ट्रीय टीम के टेस्ट कोच के पद के लिए लाया जा रहा है — यह रिपोर्ट बिना किसी सच्चाई के बताया गया। यह बैठक भारतीय क्रिकेट के भविष्य के आधार को मजबूत करने और युवा खिलाड़ियों के विकास के लिए CoE की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसमें प्रशिक्षण ढांचे से लेकर भर्ती और टूर्स के आयोजन तक कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई।
भारत ए और अंडर-19 टीमों को मिलेगा फायदा
बीसीसीआई अब ‘भारत ए’ और अंडर-19 टीमों पर खास ध्यान दे रहा है। कई बार सीनियर टीम के दौरे और ए टीम के मैच एक ही समय पर हो जाते हैं, जिससे युवा खिलाड़ियों को नुकसान होता है।
अब बोर्ड ऐसी योजना बना रहा है कि सीनियर टीम के किसी विदेशी दौरे से पहले भारत ए टीम वहां जाकर खेले। इससे युवा खिलाड़ी हालात समझ सकेंगे और जरूरत पड़ने पर सीधे सीनियर टीम के लिए तैयार रहेंगे।
क्रिकेट को अब विज्ञान की तरह देखा जाएगा
अब क्रिकेट को सिर्फ खेल नहीं, बल्कि एक विज्ञान माना जा रहा है। सेंटर में स्पोर्ट्स साइंस और एजुकेशन हेड जैसे पद बनाए गए हैं। इसका मकसद है कि खिलाड़ियों की चोटें कम हों, वे जल्दी ठीक हों और उनका करियर लंबा चले।
चोट से वापसी आसान होगी कई बार खिलाड़ी चोट के कारण लंबे समय तक बाहर रह जाते हैं। अब इस सेंटर में ऐसी व्यवस्था होगी कि खिलाड़ी सही इलाज और ट्रेनिंग के साथ जल्दी वापसी कर सकें।
ऋषभ पंत ने इसी सेंटर में रहकर अपनी गंभीर चोट से सफलतापूर्वक रिकवरी की है। यह इस बात का बड़ा उदाहरण है कि यह सेंटर खिलाड़ियों के लिए कितना उपयोगी है। अब तिलक वर्मा जैसे युवा खिलाड़ियों के लिए भी यह सेंटर बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है, जहाँ उन्हें सही मार्गदर्शन, आधुनिक सुविधाएँ और विशेषज्ञों की देखरेख मिलती है।
खिलाड़ियों को फिट रहने, अपनी ताकत वापस पाने और चोट से उबरने के लिए इससे बेहतर सेंटर शायद ही कोई हो। यहाँ फिजियोथेरेपी, ट्रेनिंग और मानसिक मजबूती पर खास ध्यान दिया जाता है, जिससे खिलाड़ी दोबारा पूरे आत्मविश्वास के साथ मैदान पर लौट सकें।
इस शानदार पहल के लिए बीसीसीआई की सराहना की जानी चाहिए। सच में कहा जा सकता है—वेल डन बीसीसीआई, क्योंकि यह सेंटर भारतीय क्रिकेट के भविष्य को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

टीम इंडिया का भविष्य सुरक्षित
कुल मिलाकर, बीसीसीआई का यह कदम टीम इंडिया को अंदर से और मजबूत बनाएगा। मजबूत बेंच स्ट्रेंथ, बेहतर फिटनेस और सही योजना के साथ भारतीय क्रिकेट आने वाले समय में और ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।
