

इस लेख में शिखा कुमार के जीवन, सोच, पारिवारिक विरासत और DDCA के प्रति उनके दृष्टिकोण पर आधारित एक विस्तृत बातचीत और विश्लेषण मनोज दत्त द्वारा प्रस्तुत किया गया है। हाल ही में उन्होंने विजय हजारे ट्रॉफी में दिल्ली टीम के शानदार प्रदर्शन पर खिलाड़ियों को बधाई दी और सभी क्रिकेट प्रेमियों को इस उपलब्धि के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
दोहरी भूमिका : व्यवसाय और प्रशासन
शिखा कुमार व्यवसाय और क्रिकेट प्रशासन—दोनों क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। एक ओर वे पति के साथ व्यवसायिक जिम्मेदारियाँ संभालती हैं, वहीं दूसरी ओर DDCA की उपाध्यक्ष के रूप में अहम प्रशासनिक दायित्व निभा रही हैं। 2002 में HCL से करियर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने 2010 तक कॉरपोरेट सेक्टर में कार्य किया। विवाह उपरांत उन्होंने कुछ समय लंदन में बिताया। इसके पश्चात वे अपने पति द्वारा स्थापित व्यवसाय से जुड़ गईं। बेटी के जन्म के तीन महीने बाद ही उन्होंने काम दोबारा संभाला और 2013 में बेटे के जन्म के बाद भी परिवार और करियर के बीच संतुलन बनाए रखा। कोविड काल में RWA सदस्य एवं सचिव के रूप में उन्होंने सुरक्षा, प्रशासन और वेस्ट मैनेजमेंट में उल्लेखनीय योगदान देते हुए डिजिटल सिस्टम लागू किए।



खेल, विरासत और मार्गदर्शन
शिखा कुमार का क्रिकेट से जुड़ाव उनकी पारिवारिक विरासत का स्वाभाविक परिणाम है। उनके पिता डॉ. सी.के. खन्ना DDCA और BCCI में लंबे समय तक महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जिससे शिखा ने बचपन से ही क्रिकेट प्रशासन की बारीकियों, निर्णय प्रक्रिया और उससे जुड़े दबावों को नज़दीक से देखा और समझा। परिवार में खेल हमेशा से जीवन का अहम हिस्सा रहा है—उनकी बेटी फुटबॉल खेलती है, जबकि बेटा क्रिकेट और फुटबॉल दोनों में रुचि रखता है। शिखा का मानना है कि खेल बच्चों के शारीरिक के साथ-साथ मानसिक विकास के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।

माता–पिता के मार्गदर्शन ने उनके व्यक्तित्व को गहराई दी। डॉ. सी.के. खन्ना ने अपने पूरे कार्यकाल में कभी कोई चुनाव नहीं हारा, जबकि उनकी माता शशि खन्ना ने कोषाध्यक्ष और उपाध्यक्ष के रूप में नेतृत्व की सशक्त मिसाल पेश की। आलोचना को अवसर में बदलना, दबाव में संयम बनाए रखना और निर्णयों पर दृढ़ रहना—ये मूल्य शिखा कुमार को विरासत में मिले।

इसी वातावरण में पली-बढ़ीं शिखा कुमार को क्रिकेट जगत की कई दिग्गज हस्तियों—स्वर्गीय जगमोहन डालमिया, अरुण जेटली, शरद पवार, एन. श्रीनिवासन और राजीव शुक्ला—से मिलने का अवसर मिला। महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली से मुलाकात उनके जीवन के यादगार क्षणों में शामिल है।

स्व. जेटली और खन्ना के बीते दौर से आज DDCA में रोहन जेटली और शिखा कुमार की सशक्त उपस्थिति
सी.के. खन्ना और दिवंगत अरुण जेटली श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC), दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेज दिनों से ही साथी रहे। आगे चलकर दोनों ने DDCA में भी लंबे समय तक क्रमशः अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद पर रहकर साथ मिलकर कार्य किया। एक सुखद संयोग यह है कि आज रोहन जेटली (अध्यक्ष) और शिखा कुमार (उपाध्यक्ष) DDCA में कंधे से कंधा मिलाकर जिम्मेदारी निभा रहे हैं।


DDCA चुनाव : व्यक्तिगत अनुभव
जब उनके पिता सी.के. खन्ना चुनाव लड़ते थे, परिवार की भूमिका सीमित रहती थी। लेकिन अपने चुनाव में शिखा कुमार नामांकन से लेकर परिणाम तक मैदान में डटी रहीं। तीन दिनों तक वे अपने पिता के साथ DDCA परिसर में तैनात रहीं, जहाँ उन्हें क्रिकेट प्रशासन में उनके पिता के सम्मान और प्रभाव का वास्तविक अहसास हुआ।


शिखा कुमार का मानना है कि रोहन जेटली एक युवा, और नेतृत्वकर्ता हैं, जो अपने दायित्वों के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उनके नेतृत्व में एपेक्स काउंसिल के सभी सदस्य समर्पण, पारदर्शिता और टीम भावना के साथ DDCA को नई ऊँचाइयों तक ले जाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

उपाध्यक्ष के रूप में प्राथमिकताएँ
उपाध्यक्ष बनने के बाद शिखा कुमार ने DDCA को अधिक संगठित, आधुनिक और खिलाड़ी–हितैषी संस्था बनाने की दिशा में कई महत्वपूर्ण पहलें कीं। प्रशासनिक सुधारों के तहत वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को सुदृढ़ किया गया है, ज़ोनल अकादमियों के माध्यम से स्थानीय प्रतिभाओं को बेहतर प्रशिक्षण देने की योजना पर कार्य हो रहा है, स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर्स (SOPs) तैयार किए जा रहे हैं तथा डिजिटल रिकॉर्ड और सिस्टम को बढ़ावा देकर कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा रहा है।

महिला क्रिकेट और DDCA की भूमिका
शिखा कुमार के प्रस्ताव को एपेक्स काउंसिल की स्वीकृति मिलने के बाद DDCA ने महिला टी20 लीग का सफल आयोजन किया, जिसका उद्घाटन स्वर्गीय अरुण जेटली की धर्मपत्नी श्रीमती संगीता जेटली ने किया। इस ऐतिहासिक लीग में DDCA से संबद्ध 42 क्लबों की टीमों और लगभग 600 महिला क्रिकेटरों ने भाग लिया। लीग की सफलता से महिला DPL 2025 की चार फ्रेंचाइज़ियों को कई उभरती हुई प्रतिभाशाली खिलाड़ी मिलीं।


क्लबों की सक्रिय भागीदारी को देखते हुए DDCA ने सभी भाग लेने वाले क्लबों को महिला क्रिकेटरों के लिए ₹1,00,000 की अतिरिक्त सहभागिता राशि देने की घोषणा की। महिला खिलाड़ियों को पुरुषों के समान मैदान, उच्च स्तरीय कोचिंग, मेडिकल सपोर्ट और हाई परफॉर्मेंस कैंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
इस वर्ष का प्रदर्शन:
- अंडर-23 महिला टीम: उपविजेता
- सीनियर महिला टीम: सेमीफाइनल
- अंडर-19 (50 व 20 ओवर): नॉकआउट चरण
DDCA, एपेक्स काउंसिल के सहयोग से, दिल्ली की पुरुष और महिला क्रिकेट दोनों के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

DDCA पहल और भविष्य की दिशा
4 जनवरी 2026 को आयोजित DDCA ब्रंच कार्यक्रम का उद्देश्य सदस्यों, उनके परिवारों और प्रशासन के बीच संवाद और आपसी विश्वास को मजबूत करना था। इस पहल से DDCA में सकारात्मक और सौहार्दपूर्ण माहौल और सुदृढ़ हुआ, तथा भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को और भव्य रूप देने की योजना है।
मेंबर्स वेलफेयर कमेटी की चेयरपर्सन के रूप में शिखा कुमार सदस्यों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं। इसके अंतर्गत रेस्टोरेंट, बार और कार्ड रूम जैसी सुविधाओं के उन्नयन के साथ-साथ महिला सदस्यों के लिए विशेष कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है।
शिखा कुमार का मानना है कि क्लब क्रिकेट ही दिल्ली क्रिकेट की रीढ़ है। इसी सोच के तहत भविष्य में अरुण जेटली स्टेडियम में लाइब्रेरी और क्रिकेट म्यूज़ियम जैसी योजनाओं पर विचार किया जा रहा है, जिससे दिल्ली क्रिकेट की विरासत और विकास—दोनों को मजबूती मिल सके।
शिखा कुमार ने मनोज दत्त से बातचीत में बताया कि उपाध्यक्ष के रूप में उनकी प्राथमिकता DDCA को अधिक संगठित, आधुनिक और खिलाड़ी–हितैषी संस्था बनाना है। अध्यक्ष रोहन जेटली के नेतृत्व और एपेक्स काउंसिल के सहयोग से वे दिल्ली की पुरुष और महिला क्रिकेट के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। DDCA का लक्ष्य सदस्यों, स्टाफ, क्लबों, खिलाड़ियों, पूर्व क्रिकेटरों, कोचों, अंपायरों और स्कोररों को सशक्त बनाते हुए दिल्ली क्रिकेट को फिर से प्रतिष्ठा के शिखर तक पहुँचाना है।
इसी विश्वास को यह पंक्तियाँ सटीक रूप से व्यक्त करती हैं—
“रुक जाना नहीं तू कहीं हार के,
काँटों पे चल के मिलेंगे साये बहार के…”