
भारतीय क्रिकेट में बहुत कम लोग ऐसे हुए हैं जिनकी टैलेंट पहचानने की क्षमता पर लगभग सर्वसम्मति हो। महेंद्र सिंह धोनी उनमें सबसे ऊपर आते हैं। उनकी नज़र से टैलेंट छुपता नहीं है। चेन्नई सुपर किंग्स की स्काउटिंग प्रणाली सिर्फ नाम या सोशल मीडिया चर्चा पर नहीं, बल्कि ग्राउंड पर दिखने वाले असर, डेटा एनालिसिस और खिलाड़ी के टेम्परामेंट पर आधारित होती है। स्काउट्स जो रिपोर्ट देते हैं, उस पर भरोसा किया जाता है—और जब यह भरोसा सही निकलता है, तो उसका असर मैदान पर साफ दिखाई देता है। इसी सोच का परिणाम हैं कार्तिक शर्मा और प्रशांत वीर—दो अलग भूमिकाओं के खिलाड़ी, लेकिन एक ही दर्शन से चुने गए।

कार्तिक शर्मा: आधुनिक व्हाइट-बॉल क्रिकेट का प्रोफ़ाइल
कार्तिक शर्मा राजस्थान के बल्लेबाज़ और विकेटकीपर हैं, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में अपने आँकड़ों से यह साबित किया है कि वे सिर्फ़ प्रतिभाशाली नहीं, बल्कि फॉर्मेट-फ्लेक्सिबल खिलाड़ी हैं।
- फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 8 मैचों में 479 रन, 43+ का औसत और 3 शतक यह दिखाते हैं कि उनकी तकनीक ठोस है।
- लिस्ट-ए क्रिकेट में 55 से अधिक का औसत और 118 का स्ट्राइक रेट बताता है कि वे एंकर और एग्रेसर—दोनों रोल निभा सकते हैं।
- टी20 क्रिकेट में 160+ का स्ट्राइक रेट उनकी मैच जिताने वाली क्षमता को रेखांकित करता है।
विकेटकीपर होने के कारण उनकी वैल्यू और बढ़ जाती है, क्योंकि आज की टीम कॉम्बिनेशन में डुअल-स्किल खिलाड़ी को प्राथमिकता दी जाती है।
आईपीएल ऑक्शन में ₹30 लाख के बेस प्राइस से ₹14.20 करोड़ तक पहुँचना इस बात का संकेत है कि फ्रेंचाइज़ी ने उन्हें केवल वर्तमान नहीं, बल्कि भविष्य के दृष्टिकोण से चुना है।

प्रशांत वीर: भविष्य का बॉलिंग ऑलराउंडर
प्रशांत रामेन्द्र वीर, महज़ 20 वर्ष की उम्र में, भारतीय क्रिकेट के उस वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो आने वाले वर्षों में टीम इंडिया की बेंच स्ट्रेंथ को मजबूत करेगा।
- बाएं हाथ के बल्लेबाज़
- स्लो लेफ्ट आर्म ऑर्थोडॉक्स गेंदबाज़
- बॉलिंग ऑलराउंडर की भूमिका
लेफ्ट-आर्म स्पिन हमेशा इंटरनेशनल क्रिकेट में एक स्ट्रैटेजिक एसेट रही है—खासकर व्हाइट-बॉल फॉर्मेट में। प्रशांत की उपयोगी बल्लेबाज़ी उन्हें केवल स्पेशलिस्ट नहीं, बल्कि कम्प्लीट पैकेज बनाती है।
उनका भी ₹30 लाख से ₹14.20 करोड़ में चुना जाना यह दिखाता है कि CSK ने उन्हें लॉन्ग-टर्म प्रोजेक्ट के रूप में देखा है।
सिफ़ारिश से चयन तक: कड़वी लेकिन सच्ची हकीकत
भारतीय क्रिकेट की ज़मीनी सच्चाई यही है कि
सिफ़ारिश या जुगाड़ से कोई खिलाड़ी स्टेट टीम तक पहुँच सकता है,
लेकिन उसके आगे का रास्ता सिर्फ़
स्किल, स्टैमिना, स्ट्रेंथ और फिटनेस तय करते हैं।
आधुनिक क्रिकेट एक हाई-परफॉर्मेंस सिस्टम है, जहाँ:
- तकनीक आधार बनाती है
- फिटनेस करियर लंबा करती है
- मानसिक मजबूती खिलाड़ी को दबाव में टिकाती है
- और एग्ज़ीक्यूशन तय करता है कि आप मैच विनर हैं या नहीं
धोनी जैसे कप्तान यहीं पर खिलाड़ियों को अलग नज़र से परखते हैं—
“क्या यह खिलाड़ी प्लान को मैदान पर उतार सकता है?”

टैलेंट + टेम्परामेंट + टेक्नीक = एग्ज़ीक्यूशन
यह समीकरण ही आज चयन की असली कुंजी है।
कार्तिक का आक्रामक स्ट्राइक रेट और प्रशांत की कंट्रोल्ड स्पिन इस बात का प्रमाण है कि दोनों खिलाड़ी सिर्फ़ नेट्स में नहीं, बल्कि मैच में परफॉर्म करने वाले हैं।

टीम इंडिया का दरवाज़ा खुलेगा?
यह सबसे अहम सवाल है।
अगर इन दोनों में से किसी एक ने या दोनों ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया, तो सैद्धांतिक रूप से टीम इंडिया का दरवाज़ा उनके लिए खुल सकता है—जैसे साई सुदर्शन के साथ हुआ।
लेकिन व्यवहारिक रूप से चयन यह भी देखेगा:
- क्या खिलाड़ी इंटरनेशनल प्रेशर झेल सकता है?
- क्या वह टीम कॉम्बिनेशन में फिट बैठता है?
- क्या वह बड़े मैचों में असर छोड़ता है?
आईपीएल में धोनी के अंडर खेलना यहाँ एक बड़ा फ़ायदा बन जाता है, क्योंकि वही स्किल्स—कूलनेस, रोल-क्लैरिटी और डिसिजन-मेकिंग—सीधे इंटरनेशनल क्रिकेट से जुड़ी हैं।

भारतीय क्रिकेट पर व्यापक असर
अगर कार्तिक शर्मा और प्रशांत वीर परफॉर्मेंस में निरंतरता रखते हैं, तो:
- व्हाइट-बॉल क्रिकेट के लिए भारत को और विकल्प मिलेंगे
- बेंच स्ट्रेंथ गहरी होगी
- सीनियर खिलाड़ियों पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनेगी
यही किसी भी मजबूत क्रिकेटिंग नेशन की पहचान होती है। धोनी की नज़र, CSK की स्काउटिंग और इन दोनों खिलाड़ियों की मेहनत—तीनों एक ही दिशा में जाती दिखती हैं। शोर नहीं, स्कोर चयन तय करता है।
और अंत में भारतीय क्रिकेट में चयन को लेकर एक आधिकारिक कथा बार-बार दोहराई जाती है—
“टीम इंडिया में जगह सिर्फ प्रदर्शन के दम पर मिलती है।”
सच यह है कि
प्रदर्शन दरवाज़ा खोलता है,
निरंतरता आपको अंदर तक ले जाती है,
और मैच-विनिंग एग्ज़ीक्यूशन आपको टीम इंडिया की जर्सी तक पहुँचाता है।
अगर कार्तिक शर्मा और प्रशांत वीर इस कसौटी पर खरे उतरते हैं,
तो टीम इंडिया उनके लिए सपना नहीं,
अगला स्वाभाविक कदम बन सकता है।
Writer : मनोज दत्त, इंटरनेशनल क्रिकेट कमेंटेटर