
भारत में क्रिकेट सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि एक भावना है। लेकिन इस विशाल क्रिकेट संसार के बीच एक ऐसी दुनिया भी है, जहाँ आवाज़ें भले ही न हों, पर जुनून, प्रतिभा और देश के लिए कुछ कर दिखाने का जज़्बा किसी भी सामान्य खिलाड़ी से कम नहीं।
यह दुनिया है Indian Deaf Cricket Association (IDCA) की — जहाँ सपने हाथों की भाषा में लिखे जाते हैं और मैदान पर पूरे जोश के साथ पूरे किए जाते हैं।

सुमित जैन – जिन्होंने चुप्पी को अपनी ताकत बनाया
सुमित जैन, एक प्रतिभाशाली बधिर क्रिकेटर, जिन्होंने अपनी कमी को कभी भी अपने जुनून के आड़े नहीं आने दिया। अपनी मेहनत, स्वाभिमान और शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने न केवल खुद को साबित किया, बल्कि देशभर के हज़ारों बधिर खिलाड़ियों के लिए एक मज़बूत प्लेटफ़ॉर्म भी तैयार किया।
उनके प्रयासों से आज बधिर क्रिकेटर भी उस मंच तक पहुँच पा रहे हैं, जिसके वे लंबे समय से हकदार थे।

बिना किसी सहायता का सफ़र – पर हौसला अटूट
IDCA की संरक्षक रीना जैन, जो सुमित की बड़ी बहन भी हैं, बताती हैं कि न तो BCCI और न ही DDCA से उन्हें कोई वित्तीय सहायता मिलती है। स्पॉन्सर्स, दानदाताओं और उनकी अपनी निजी बचत के भरोसे ही पूरी टीम के लिए यात्रा, प्रशिक्षण और टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं। फिर भी, उनका हौसला आज भी पहले जितना ही प्रबल है क्योंकि लक्ष्य सिर्फ़ खेलना नहीं—बल्कि अपने समुदाय के लिए एक पहचान बनाना है।
रीना जैन – एक बहन, एक वकील, एक संरक्षक… और सबसे बढ़कर एक प्रेरणा
Indian Deaf Cricket Association की संरक्षक रीना जैन, सुमित जैन की बड़ी बहन हैं।
रीना और उनके पति — दोनों पेशे से वकील हैं। अपने व्यस्त पेशेवर जीवन के बावजूद वे बधिर क्रिकेट के लिए आर्थिक, प्रशासनिक और भावनात्मक—हर तरह का समर्थन देते हैं फिर भी वे अपने व्यक्तिगत संसाधनों, स्पॉन्सर्स के सहयोग और अडिग समर्पण के सहारे इस पूरी व्यवस्था को संभालते हैं। रीना जैन का समर्पण सिर्फ़ एक बहन के प्रेम तक सीमित नहीं—वे हजारों बधिर खिलाड़ियों के लिए उम्मीद और हौसले का आधार हैं।

26,000 से अधिक बधिर क्रिकेटर – एक मौन क्रांति
आज इस एसोसिएशन से लगभग 26,000 पुरुष और महिला बधिर क्रिकेटर पूरे भारत से जुड़े हुए हैं।
हिम्मत, प्रतिभा और संघर्ष की इस लंबी कतार में, हाल ही में लखनऊ में आयोजित Deaf Women Cricket Tournament में 300 से अधिक महिला खिलाड़ियों ने भाग लेकर इतिहास रच दिया। वर्ष 2012 में Deaf Cricket Society की नींव रखी गई। वर्ष 2020 में India Deaf Association की स्थापना हुई, जिसमें आज 20 राज्य जुड़े हुए हैं। 2024 में Asian Deaf Cricket Association बनाकर एशियाई स्तर पर भी मंच तैयार किया गया।

दुबई का अगला मिशन और पहला एशिया कप
9 दिसंबर 2025 को भारतीय बधिर टीम दुबई रवाना होगी, जहाँ वे UAE के खिलाफ T20 श्रृंखला खेलेंगे।
इससे पहले इंग्लैंड दौरे पर टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 7–5 से जीत हासिल की थी। और अब 2026 में, ओडिशा में पहला “Asia Deaf Cup” आयोजित होगा, जिसमें नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, UAE और भारत की टीमें भाग लेंगी। यह आयोजन भारतीय बधिर क्रिकेट को विश्व पटल पर एक नई पहचान देने वाला साबित होगा।

रीना और सुमित — दो नाम, जिन पर भारत को गर्व होना चाहिए
सुमित जैन मैदान पर युवाओं के लिए मिसाल हैं, तो रीना जैन मैदान के बाहर इस पूरे मिशन की रीढ़।
दोनों मिलकर उन खिलाड़ियों का भविष्य रोशन कर रहे हैं, जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है।
बधिर क्रिकेटरों का संघर्ष सिर्फ़ खेल में जीत का नहीं—बल्कि सम्मान, पहचान और बराबरी के अधिकार का संघर्ष भी है।


देव दत्त, भारतीय बधिर क्रिकेट टीम / संघ के मुख्य कोच
यह सिर्फ़ क्रिकेट नहीं, एक आंदोलन है
Indian Deaf Cricket Association का हर मैच, हर आयोजन और हर खिलाड़ी यह संदेश देता है कि
प्रतिभा किसी आवाज़ की मोहताज नहीं होती।
जुनून बोलता है—और दुनिया उसे सुनती है।
बधिर क्रिकेटरों के इस अद्भुत सफ़र को सलाम।
रीना जैन और सुमित जैन जैसे लोग ही असली अर्थों में भारत की ताकत हैं।

Writer: Manoj Dut, BCCI, Umpire, Commentator & Sports Journalist