दिल्ली क्रिकेट में नई ऊर्जा: DDCA बॉलिंग कैंप से स्थानीय खिलाड़ियों को मिलेगा बड़ा मौका


by Manoj Dutt
दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) ने नई पहल के रूप में तेज और स्पिन गेंदबाजों के लिए ओपन ट्रायल्स आयोजित करने की घोषणा की है। यह ट्रायल्स दिल्ली के उन खिलाड़ियों के लिए सुनहरा अवसर साबित होंगे जो अब तक चयन प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पा रहे थे।
DDCA के अनुसार, आवेदन केवल उन्हीं खिलाड़ियों के लिए मान्य होंगे जो दिल्ली के निवासी हैं, दिल्ली में जन्मे हैं या जिनके पास 1 सितम्बर 2024 से पहले का वैध दिल्ली पता प्रमाण है।
इच्छुक खिलाड़ी अपने विवरण नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध गूगल फॉर्म में भर सकते हैं:
🔗 https://forms.gle/QAq7REinb5RkNhFy9
आवेदन की अंतिम तिथि 20 नवम्बर 2025 निर्धारित की गई है। ट्रायल्स की तारीख और समय शीघ्र ही DDCA की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे।
स्थानीय क्रिकेट को नई दिशा
यह निर्णय दिल्ली क्रिकेट में नई जान फूंकने वाला साबित हो सकता है। लंबे समय से स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं को अवसर न मिलने की शिकायतें उठती रही हैं। DDCA का यह कदम उन खिलाड़ियों के लिए मंच तैयार करेगा जो दिल्ली की गलियों, क्लबों और अकादमियों में वर्षों से मेहनत कर रहे हैं।
पिछले कुछ सीज़न और इस सीज़न में दिल्ली का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा है। ऐसे में DDCA का यह कदम बेहद उपयोगी और अवसरकारी साबित होगा। यह पहल टीम के प्रदर्शन को सुधारने और नई ऊर्जा लाने की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है
संगठन के एक अधिकारी के अनुसार, “हमारा लक्ष्य है कि दिल्ली से फिर नई गेंदबाजी प्रतिभाएँ उभरें, जो राज्य और राष्ट्रीय टीमों का भविष्य बनें।”
गेंदबाजी पर विशेष ध्यान
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली से कई बेहतरीन बल्लेबाज निकले हैं, लेकिन गुणवत्तापूर्ण गेंदबाजों की संख्या कम रही है। यह ओपन कैंप गेंदबाजों को केंद्र में रखकर आयोजित किया जा रहा है ताकि तेज़ और स्पिन दोनों तरह की प्रतिभाओं को बराबर अवसर मिले।
DDCA के कोचिंग प्रोग्राम का उद्देश्य ऐसे गेंदबाज तैयार करना है जो रणजी ट्रॉफी और आईपीएल जैसी प्रतिस्पर्धाओं में दिल्ली का प्रतिनिधित्व कर सकें।
1970–2000 का स्वर्ण युग: इंटर कॉलेज क्रिकेट की अहम भूमिका
दिल्ली क्रिकेट की सफलता की नींव 1970 से 2000 के दशक के बीच पड़ी थी। उस दौर में दिल्ली विश्वविद्यालय के इंटर कॉलेज टूर्नामेंट्स युवा खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा मंच थे। सेंट स्टीफंस, हिन्दू कॉलेज, DAV कॉलेज, राजधनी कॉलेज, खालसा कॉलेज और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स जैसे संस्थानों से कई नामी खिलाड़ी निकले — जिनमें सुरिंदर खन्ना, कीर्ति आज़ाद, सुनील वाल्सन, रमन लांबा, मनोज प्रभाकर, मनिंदर सिंह, अतुल वासन, संजीव शर्मा, अजय शर्मा, अभय शर्मा, मनु नैय्यर, राजकुमार शर्मा (विराट कोहली के कोच), संजय शर्मा, आकाश चोपड़ा और आशीष नेहरा जैसे दिग्गज शामिल हैं। इन खिलाड़ियों ने कई वर्षों तक दिल्ली की रणजी ट्रॉफी टीम को अपनी सेवाएँ दीं और दिल्ली को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उस समय कॉलेज क्रिकेट ही चयन समितियों की नज़र में मुख्य मानदंड था। मैचों के दौरान खिलाड़ियों में न केवल खेल कौशल बल्कि अनुशासन, टीम भावना और प्रतिस्पर्धा का भी विकास होता था।
आज की स्थिति में बदलाव
वर्तमान में इंटर कॉलेज क्रिकेट का प्रभाव काफी घट गया है। आईपीएल, निजी अकादमियों और क्लब क्रिकेट के उभार ने कॉलेज क्रिकेट को पीछे छोड़ दिया है। अब खिलाड़ी शिक्षा संस्थानों की बजाय निजी प्रशिक्षकों और फ्रेंचाइज़ी टीमों के माध्यम से आगे बढ़ते हैं।
फिर भी, DDCA की यह नई पहल पुराने इंटर कॉलेज ढांचे की कमी को किसी हद तक पूरा करने की एक सकारात्मक दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है
DDCA का ओपन बॉलिंग कैंप दिल्ली क्रिकेट में पारदर्शिता और समान अवसर की भावना को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। यदि इस तरह की चयन प्रक्रियाएँ नियमित रूप से जारी रहती हैं, तो दिल्ली एक बार फिर से भारतीय क्रिकेट की मजबूत धुरी बन सकती है — जैसे वह 1970–2000 के स्वर्ण युग में थी।
और हाँ — अगर आपके पास हुनर, स्टैमिना और स्ट्रेंथ है, तो DDCA कैंप आपका स्वागत करता है।
दमखम दिखाया तो “बल्ले ही बल्ले” हैं!