पूरी दुनिया पूछ रही है —
क्या 15 फ़रवरी 2026 को भारत-पाकिस्तान का मैच होगा? लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है: पाकिस्तान क्रिकेट आखिर चाहता क्या है? 1 फ़रवरी 2026 को पाकिस्तान क्रिकेट ने खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी नहीं मारी, बल्कि पूरी व्यवस्था की जड़ों को खोद दिया।
1 फ़रवरी 2026: जब विरोधाभास शर्म में बदल गया
इसी दिन: पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने ऐलान किया कि वह 15 फ़रवरी 2026 को ICC T20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ मैच नहीं खेलेगा और इसी दिन पाकिस्तान की अंडर-19 टीम भारत के खिलाफ ICC अंडर-19 वर्ल्ड कप में मैदान पर उतरी… और हार गई
यह सिर्फ विरोधाभास नहीं है। यह संस्थागत भ्रम, राजनीतिक अवसरवाद और बौद्धिक दिवालियापन का सबूत है।
अगर भारत से खेलना गलत है, तो उम्र देखकर सही कैसे हो गया?
PCB को यह बताना चाहिए: अगर भारत के खिलाफ खेलना “सिद्धांत” के खिलाफ है तो अंडर-19 क्यों खेले? अगर सुरक्षा या राजनीति कारण है तो बच्चों को क्यों भेजा? अगर ICC की मजबूरी है तो सीनियर टीम क्यों भागी?
इसका एक ही निष्कर्ष निकलता है:
👉 PCB के पास न नीति है, न निरंतरता, न समझ।
पाकिस्तान की नखरे वाली खोखली राजनीति (सह-मेज़बान श्रीलंका को पूरी तरह नज़रअंदाज़)
शुरुआत से ही पाकिस्तान का रुख साफ था कि वह “T20 वर्ल्ड कप 2026 श्रीलंका में खेलेगा”, लेकिन कहीं भी यह नहीं कहा गया था कि “भारत के खिलाफ नहीं खेलेगा”। अब पूरी बहस भारत–पाकिस्तान पर सिमट गई है, जबकि सह-मेज़बान श्रीलंका को पूरी तरह नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। क्रिकेट जगत में यह बात मानी जाती है कि
“भारत–पाकिस्तान मुकाबला किसी भी ICC टूर्नामेंट की आर्थिक रीढ़ होता है।”
अगर यह मैच श्रीलंका में नहीं होता, तो इसका सीधा असर श्रीलंका क्रिकेट की कमाई पर पड़ेगा—टिकट, ब्रॉडकास्ट और स्पॉन्सरशिप सभी प्रभावित होंगे। T20 वर्ल्ड कप में हाइब्रिड मॉडल व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि
“ICC इवेंट्स में सभी टीमों को तय स्थानों पर खेलने की बाध्यता होती है।”
अगर भारत नहीं खेलता, तो मैच श्रीलंका में होना तय है। लेकिन अब पाकिस्तान का यह कहना कि वह श्रीलंका में भी नहीं खेलेगा, सीधे तौर पर ICC के Member Participation Agreement (MPA) के खिलाफ जाता है, जिसमें साफ लिखा है कि
“कोई भी सदस्य बोर्ड बिना वैध कारण के ICC इवेंट से हट नहीं सकता।”
उदाहरण: 2023 एशिया कप में हाइब्रिड मॉडल एक अस्थायी समाधान था, लेकिन ICC टूर्नामेंट्स को लेकर हमेशा यही रुख रहा है कि
“वर्ल्ड कप में व्यक्तिगत शर्तों के लिए कोई जगह नहीं होती।”
अगर पाकिस्तान अब भी अड़ियल रुख अपनाता है और समझौते का उल्लंघन करता है, तो
“ICC के पास सदस्य टीम को निलंबित या टूर्नामेंट से बाहर करने का अधिकार है।”
कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ भारत–पाकिस्तान का नहीं, बल्कि श्रीलंका के हितों और ICC की साख से जुड़ा है—और इसमें सबसे ज़्यादा जोखिम पाकिस्तान खुद उठा रहा है। यह खुद को ICC से अलग-थलग करने जैसा होगा। स्पष्ट है —
भारत को कोई डेंट नहीं,
नुकसान सिर्फ पाकिस्तान का है:
साख का भी और क्रिकेट का भी।
यह खेल का फैसला नहीं था, यह सस्ती राजनीति थी

ICC भावनाओं से नहीं, अनुबंध से चलता है
पाकिस्तान जिस बात को नज़रअंदाज़ कर रहा है, वह है
ICC Member Participation Agreement (MPA)।, हर ICC इवेंट से पहले बोर्ड इसे साइन करता है, यह कानूनी अनुबंध होता है, भाषण नहीं “हम यह मैच नहीं खेलेंगे” सीधा अनुबंध उल्लंघन बन सकता है, ICC के लिए यह सवाल भारत का नहीं है, विश्वसनीयता और सिस्टम का है।
वॉकओवर (Walkover) या फॉरफिट (Forfeit) सिर्फ शुरुआत है, असली चोट बाद में लगती है
अगर पाकिस्तान मैच नहीं खेलता: भारत को पूरे अंक मिलेंगे, पाकिस्तान को हार और NRR नुकसान लेकिन असली नुकसान यहाँ नहीं है।
असली नुकसान:
i. ICC रेवेन्यू शेयर में कटौती
ii. Annual Grant पर असर
iii. ब्रॉडकास्टर लॉस की भरपाई
iv. भविष्य के ICC इवेंट्स से अलगाव
और यह सब: काग़ज़ी नियमों में लिखा हुआ है।
PSL, विदेशी खिलाड़ी और अंतरराष्ट्रीय अलगाव
पाकिस्तान शायद यह भूल रहा है कि: ICC का असर सिर्फ वर्ल्ड कप तक सीमित नहीं, खिलाड़ियों की NOC, बोर्ड-टू-बोर्ड संबंध और विदेशी खिलाड़ियों की प्राथमिकता
जब कोई बोर्ड: अविश्वसनीय बन जाता है, नियम तोड़ने वाला माना जाता है तो सिस्टम चुपचाप उसके खिलाफ काम करने लगता है।
बांग्लादेश के चक्कर में अकेला पड़ता पाकिस्तान
जिस बांग्लादेश के लिए पाकिस्तान मोर्चा ले रहा है: वही बांग्लादेश भविष्य में अपने हित में पाकिस्तान के खिलाफ वोट कर सकता है, ICC में पाकिस्तान पहले ही कमजोर स्थिति में है। यह पूरा प्रकरण: “बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना” का सटीक उदाहरण है।
PCB के सलाहकार: शोर बहुत, समझ शून्य
अगर यही PCB सलाहकारों की सोच का स्तर है: तो उन्हें ICC सिस्टम की समझ नहीं, अंतरराष्ट्रीय राजनीति की समझ नहीं और क्रिकेट अर्थव्यवस्था की तो बिल्कुल नहीं
ये सलाहकार:
पाकिस्तान क्रिकेट के रक्षक नहीं उसके सबसे बड़े नुकसानकर्ता बन चुके हैं।
अंडर-19 की हार छोटी है, सीनियर सिस्टम की हार ऐतिहासिक
अंडर-19 का हारना खेल का हिस्सा है। लेकिन सीनियर टीम का भागना संदेश देता है: “हिम्मत खिलाड़ियों में है, डर बोर्डरूम में।”यह भारत के खिलाफ हार नहीं है। यह खुद से हार है।
यह भारत बनाम पाकिस्तान नहीं है
यह लड़ाई: भारत बनाम पाकिस्तान नहीं, राजनीति बनाम क्रिकेट नहीं
यह लड़ाई है: पाकिस्तान बनाम यथार्थ
भारत: खेले या न खेले, आगे बढ़ेगा, टूर्नामेंट चलता रहेगा
लेकिन पाकिस्तान: खुद को अविश्वसनीय बना रहा है, खुद को आर्थिक नुकसान में डाल रहा है और खुद को ICC सिस्टम से अलग कर रहा है
दुश्मन बाहर नहीं, अंदर है
1 फ़रवरी 2026 याद रखा जाएगा: जब बच्चे भारत से खेले और PCB भाग गया, जब नीति नहीं, सिर्फ भ्रम दिखा और जब राजनीति ने क्रिकेट को पूरी तरह निगल लिया पाकिस्तान क्रिकेट को किसी साज़िश की ज़रूरत नहीं , किसी दुश्मन की ज़रूरत नहीं
👉 PCB खुद ही काफ़ी है।





