

by Manoj Dutt
भारत के घरेलू क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं जिन्होंने कड़ी मेहनत से रिकॉर्ड बनाए, लेकिन कभी अंतरराष्ट्रीय पहचान नहीं पा सके। हिमाचल प्रदेश के पारस डोगरा उन्हीं में से एक हैं — जिनकी कहानी “कड़ी मेहनत, संघर्ष और सपनों पर भरोसा” की मिसाल है।

शुरुआती जीवन और संघर्ष
19 नवंबर 1984 को पालमपुर (हिमाचल प्रदेश) में जन्मे पारस डोगरा ने ऐसे राज्य से क्रिकेट की शुरुआत की जहाँ क्रिकेटिंग सुविधाएँ सीमित थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी — वे मैदान पर हर रन के लिए लड़ते रहे।
“जब हालात साथ न दें, तो मेहनत को अपना साथी बना लो।”
— यही डोगरा के क्रिकेट जीवन का मूल मंत्र रहा।
2001-02 सीज़न में रणजी डेब्यू करने के बाद वे हिमाचल प्रदेश टीम के सबसे भरोसेमंद बल्लेबाज़ बने। उनके धैर्य और लगातार प्रदर्शन ने उन्हें “Mr. Dependable” बना दिया।

10,000 रन और 34 शतक – एक मूक महानता
पारस डोगरा के आंकड़े खुद उनके जुनून की कहानी कहते हैं:
- फर्स्ट क्लास मैच: 147
- रन: 10,335
- औसत: 48.98
- शतक: 34
- अर्धशतक: 34
“कभी-कभी चमकने के लिए मंच नहीं, सिर्फ यकीन चाहिए।”
2012-13 सीज़न में उन्होंने 8 मैचों में 5 शतक जड़े — जिनमें से तीन लगातार इनिंग्स में आए। यह प्रदर्शन उन्हें India A टीम तक ले गया।

🇮🇳 India A में मौका और अधूरी उम्मीद
2013 में वेस्टइंडीज़ A के खिलाफ पारस डोगरा को अनऑफिशियल टेस्ट सीरीज़ में मौका मिला, लेकिन केवल एक इनिंग में 7 रन बनाकर वे आउट हो गए। इसके बाद उन्हें दोबारा कभी नहीं आज़माया गया।
“हार का मतलब यह नहीं कि आप पीछे रह गए, बल्कि यह कि अब आपको और मेहनत करनी है।”

IPL का छोटा लेकिन यादगार सफ़र
पारस डोगरा ने कई IPL टीमों के लिए खेला:
- राजस्थान रॉयल्स (2010)
- किंग्स XI पंजाब (2012)
कोलकाता नाइट राइडर्स (2013)
- गुजरात लायंस (2016)
हालाँकि उन्हें सीमित मौके मिले, पर उनकी शांति और टीमवर्क ने उन्हें हर ड्रेसिंग रूम में सम्मान दिलाया।

रणजी ट्रॉफी में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड
2015-16 में उन्होंने लगातार दो डबल सेंचुरी (त्रिपुरा और सर्विसेज़ के खिलाफ) जड़कर इतिहास बनाया। उस सीज़न में उन्होंने 703 रन बनाए औसत 78.11 से।
“सच्चे खिलाड़ी की पहचान यह नहीं कि वो कब गिरा, बल्कि यह कि वो हर बार उठकर खेला।”

दिल्ली के खिलाफ ऐतिहासिक लम्हा (2025-26)
2025-26 रणजी ट्रॉफी के राउंड 4 में जम्मू-कश्मीर ने दिल्ली के खिलाफ पहली बार बढ़त हासिल की — और इस जीत की नींव रखी पारस डोगरा ने। उन्होंने शानदार शतक जमाकर टीम को मज़बूत स्थिति में पहुंचाया। “जो अपने राज्य के लिए खेलता है, वो सिर्फ रन नहीं बनाता — वो उम्मीद बनाता है।”

माइक हसी जैसी अधूरी पर प्रेरक कहानी
ऑस्ट्रेलिया के माइक हसी ने 30 की उम्र के बाद डेब्यू किया और दुनिया को दिखाया कि “टाइमिंग सब कुछ नहीं होती।” डोगरा की कहानी भी वैसी ही है — बस फर्क इतना कि उन्हें वह एक “अवसर” नहीं मिला।
“हर खिलाड़ी को मैदान मिलता है, लेकिन हर किसी को मौका नहीं मिलता। असली खिलाड़ी वो है, जो बिना मौके के भी खेलता रहता है।”

वर्तमान में – Food Corporation of India (FCI) में सेवाएं
आज पारस डोगरा फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) में कार्यरत हैं।
उन्होंने क्रिकेट मैदान पर जो अनुशासन, समर्पण और मेहनत दिखाई, वही गुण वे अपने कार्यक्षेत्र में भी निभा रहे हैं।
“सफलता सिर्फ मैदान पर नहीं, जीवन के हर क्षेत्र में वही पाता है जो दिल से मेहनत करता है।”
और सच कहें तो —
“10,000 रन पूरे करने वाले खिलाड़ी को एक प्रमोशन तो बनता है!”
यह कोई बड़ी माँग नहीं, बस एक छोटा-सा सम्मान का प्रस्ताव है — उस खिलाड़ी के लिए जिसने देश के लिए नहीं, पर क्रिकेट के लिए जीया है।

संघर्ष से जन्मी प्रेरणा
पारस डोगरा की यात्रा हर युवा खिलाड़ी को यह सिखाती है कि “अगर जुनून सच्चा हो, तो पहचान देर से ही सही, लेकिन मिलती ज़रूर है।” वे भारतीय क्रिकेट के उस वर्ग का प्रतीक हैं जो बिना तामझाम, बिना स्पॉटलाइट — बस खेल के लिए खेलता है।“सपना तभी सच होता है, जब आप उसके लिए सोना छोड़ देते हैं।”