
भारतीय क्रिकेट में चयन प्रक्रिया हमेशा चर्चा का विषय रही है। जब मोहिंदर अमरनाथ ने 1980 के दशक में चयनकर्ताओं को “बंच ऑफ जोकर्स” कहा था, तब उन्होंने चयन में पारदर्शिता और योग्यता की कमी पर सवाल उठाया था। आज, एशिया कप 2025 के लिए घोषित टीम को देखकर एक बार फिर वही सवाल उठते हैं।
चयनित टीम की झलक:
कप्तान: सूर्यकुमार यादव
उपकप्तान: शुभमन गिल
अन्य प्रमुख खिलाड़ी: हार्दिक पंड्या, संजू सैमसन, जसप्रीत बुमराह, रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, अभिषेक शर्मा, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल आदि
पक्षपात के संकेत:
श्रेयस अय्यर और यशस्वी जायसवाल जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी टीम से बाहर हैं, जबकि उन्होंने हालिया आईपीएल और अंतरराष्ट्रीय मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया था।
कुछ खिलाड़ियों का चयन उनके IPL प्रदर्शन के आधार पर हुआ, जबकि घरेलू क्रिकेट या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतरता दिखाने वाले खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया गया।
अनुभव बनाम युवा जोश: चयनकर्ताओं ने युवा खिलाड़ियों को तरजीह दी है, लेकिन क्या यह अनुभव की कीमत पर हुआ?
यह टीम भविष्य की ओर देखती है, खासकर 2026 T20 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए। लेकिन चयन में कुछ नाम ऐसे हैं जिनकी जगह पर बहस हो सकती है।
चयन समिति के अध्यक्ष अजीत आगरकर ने कहा कि टीम संतुलित है, लेकिन आलोचकों का मानना है कि कुछ चयन “ब्रांड वैल्यू” या “फ्रेंचाइज़ी प्रभाव” के आधार पर हुए हैं।
मोहिंदर अमरनाथ का बयान आज भी प्रासंगिक लगता है जब चयन में पारदर्शिता और योग्यता पर सवाल उठते हैं। टीम इंडिया की सफलता चयनकर्ताओं की दूरदृष्टि पर निर्भर करेगी—लेकिन अगर चयन में पक्षपात हुआ है, तो यह भविष्य में टीम के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकता है।